नील कमल
कुछ कविताएँ , कुछ अनुवाद ..
Showing posts with label
दहाड़
.
Show all posts
Showing posts with label
दहाड़
.
Show all posts
Tuesday, October 15, 2019
दहाड़
दहाड़ते हैं आप
और एक परिंदा भी नहीं उड़ता
मांस का टुकड़ा उछालता है कोई
आप सोचते हैं आपने किया शिकार
एक बहुत बड़े बाड़े में आप रहते हैं आजकल
किसी ने बताया नहीं आपको, आप सर्कस में हैं,
आपका एक रिंग मास्टर है, आपसे भी शक्तिशाली ।
- नील कमल
Older Posts
Home
Subscribe to:
Posts (Atom)